नेत्र सहायक ने चेंबर में ही डीपीएम को पीटा कहा- नियम बताकर साइन नहीं कर रहे थे

जगदलपुर . स्वास्थ्य विभाग में सोमवार को नेत्र सहायक जी नायर ने एनआरएचएम के डीपीएम अखिलेश शर्मा की पिटाई कर दी है। नेत्र सहायक द्वारा पिटाई के बाद डीपीएम ने मामले की शिकायत बोधघाट थाने में की है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पिटाई के बाद जो पहली खबर सामने आई है उसके अनुसार किसी सप्लायर के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के प्रिंटआउट पर हस्ताक्षर करने के लिए नेत्र सहायक लगातार चक्कर काट रहा था। 



सोमवार को भी जब नेत्र सहायक साइन करवाने डीपीएम के कार्यालय पहुंचा तो डीपीएम ने कहा कि पूर्व में यदि उनके द्वारा कोई अनुमोदन किया गया है तो दिखाएं, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उन्होंने हस्ताक्षर से इंकार कर दिया। फिर नेत्र सहायक ने गाली गलौज करते चेंबर में ही डीपीएम को पीट दिया। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी इसी कार्यालय में इसी तरह की मारपीट की घटना हो चुकी है। 


अनुमोदन के बगैर करा रहे थे हस्ताक्षर: डीपीएम
डीपीएम अखिलेश शर्मा ने कहा है कि नेत्र सहायक फाइल पहले भी ला चुके थे। मैने उन्हें बताया था कि नियम के हिसाब से फाइल बनाकर लाएं। चूंकि रकम मैं जारी कर रहा हूं इसलिए सारी जवाबदारी मेरी है। उन्होंने मुझसे कोई अनुमोदन नहीं लिया था। वे सीधे भुगतान के कागज ले आए तो मैंने पूछा कि आपने क्या क्रय किया है मेरा अनुमोदन कहां है? इसके बाद उन्होंने गाली-गलौच की और हमला कर दिया।


नए नियम बताने लगे, फाइल भी फेंक दी: नेत्र सहायक 


नेत्र सहायक जी नायर का कहना है कि एक हफ्ते पहले साइन के लिए दी थी सोमवार को जब डीपीएम के चेंबर में गया तो डीपीएम नये-नये नियम बताने लगे। नये नियम मुझे पता नहीं थे मैंने डीपीएम से कहा कि आप बताएं फाइल में क्या करना है तो इस पर कहने लगे नहीं, हो ही नहीं सकता। मैं साइन करूंगा ही नहीं, मुझे 22 तारीख से घुमा रहे है। चेंबर में साइन नहीं करुंगा कहकर फाइल मेरे उपर फेंक दी। मेरा बीपी हाई हो गया और मैने पिटाई कर दी।


मारपीट की जानकारी मिली


सीएमएचओ आरके चतुर्वेदी का कहना है कि जिस फाइल के संबंध में मारपीट हुई है उसकी जानकारी नहीं है। देखने के बाद ही बता पाऊंगा िक फाइल मेरे यहां से पास हुई थी या नहीं।


नेत्र सहायक को एकाउंट का अतिरिक्त प्रभार किसने दिया, इसका जवाब किसी के पास नहीं
इधर नेत्र सहायक जी नायर का मूल काम नेत्र रोग से संबधित ही है, लेकिन वह कई सालों से एकाउंटेंट का काम कर रहा है। नेत्र सहायक को यह अतिरिक्त प्रभार कब और किसने दिया, इसकी जानकारी देने को कोई तैयार नहीं है। 


बड़ा सवाल: कहीं नियम को ताक पर तो नहीं रखा?


जिस फाइल को पास करवाने के लिए मारपीट हुई है उसको लेकर अब कई सवाल खड़े होने लगे है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस फाइल में करीब दो सौ मरीजों के आंखों के ऑपरेशन के लिए सप्लाई किए गए सामानों के बिल थे। बिल का भुगतान एनआरएचएम को अंधत्व निवारण योजना के तहत करना था। आंखों के इलाज के लिए खरीदे गए सामानों के भुगतान से पहले संबधित फाइल की जांच सीएमएचओ करते है। मामले में भी फाइल पहले सीएमएचओ के पास गई थी। सीएमएचओ ने फाइल को आगे बढ़ाया था। सवाल यह कि जब फाइल नियमों के अनुसार नहीं थी तो सीएमएचओ ने इसे आगे कैसे बढ़ा दिया और नियमों के हिसाब से फाइल देखने के बाद सीएमएचओ ने बढ़ाया था तो डीपीएम क्यों इसे नियम विरुद्ध बता रहे हैं।