इंदौर
कांग्रेस नेता और आईपीएल के पूर्व चैयरमेन राजीव शुक्ला ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम को लेकर कहा- जनता भाजपा को हराना चाहती थी। वोटों का बंटवारा ना हो जाए, इसलिए लोगों ने कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी को वोट दिए। शुक्रवार को इंदौर में भास्कर से चर्चा में शुक्ला ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाहर लाल नेहरू पर जो बयान दिया है उसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। बुधवार को किताब के हवाले से जयशंकर ने कहा था- नेहरू नहीं चाहते थे कि 1947 की कैबिनेट में सरदार पटेल रहें।
प्रश्न- जवाहर लाल नेहरू को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान पर क्या प्रतिक्रिया है?
शुक्ला- जयशंकरजी हमारे बहुत अच्छे मित्र हैं। उनसे इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। बहुत अच्छी बात है कि उनके इस बयान का खंडन और विरोध देश के बड़े इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने किया है। गुहा ने जो जवाब दिया, जो खंडन किया, वो तथ्यों व सबूतों के साथ किया है। गुहा ने सोशल मीडिया पर वह चिठ्ठियां भी डाली हैं, जो जो नेहरू ने सरदार पटेल को 1947 में लिखी थी। उन खतों में लिखा है कि यू आर द मोस्ट वैल्युएबल कलिग ऑफ माय गवर्नमेंट, यू आर वेलकम टू ज्वाइन गवर्नमेंट। जयशंकर ने जो कहा, उसका दस्तावेजों से खंडन हो गया। मुझे लगता है कि उचित यही होगा कि वह (जयशंकर) माफी मांगें। मेरी समझ में यह नहीं आता कि जब आपको कुछ नहीं मिल रहा तो आप नेहरूजी को गालियां देने लगते हैं। यह नया ट्रेंड आ गया है। 70 साल पहले क्या हुआ था, आज पर तो कोई बात ही नहीं कर रहा।
प्रश्न- दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के क्या कारण रहे?
शुक्ला- दिल्ली चुनाव के परिणाम ने बड़ा स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली की जनता भाजपा को हराना चाहती थी और भाजपा के विरुद्ध थी। भाजपा के विरुद्ध समाज के सभी वर्ग और धर्म के लोग थे, इसलिए उन्हें लगा कि कहीं वोटों का बंटवारा नहीं हो जाए, इसलिए उन्होंने कांग्रेस की बजाय आम आदमी पार्टी को वोट दे दिया ताकि भाजपा हारे। दो बार असफलता मिलने के बावजूद दिल्ली को संवारने का श्रेय कांग्रेस और शीला दीक्षित को जाता है। चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने लोगों को सांप्रदायिक रूप से भड़काने का प्रयास किया लेकिन उन्हें हार मिली।
प्रश्न- दिल्ली चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस में खुद अंतर्कलह मची है?
शुक्ला- परिणाम के बाद हर जगह आंतरिक कलह होती है। हम अपने संगठन में सुधार करेंगे, संगठन को मजबूत करेंगे।
प्रश्न- कांग्रेस द्वारा लगातार केन्द्र सरकार को आरक्षण का विरोधी बताया जा रहा है?
शुक्ला- एससी-एसटी आरक्षण पर केंद्र सरकार की नियत साफ नही है। सरकार गरीबों का हक़ छीनना चाहती है। इस मामले केंद्र सरकार कोर्ट गई थी। प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में हैं। उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। लेकिन कांग्रेस गरीबों के के साथ है। इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी भी की जा रही है।
प्रश्न- देश की लगातार कमजोर होती अर्थव्यवस्था पर क्या कहना है?
शुक्ला- अभी वित्तमंत्री द्वारा जो बजट पेश किया गया और उस पर जो स्पीच हुई है उसके बाद पी चिदंबरम और अन्य नेता लगातार बोल रहे हैं। हम सरकार को सलाह देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वह लेने को तैयार नहीं। अर्थव्यवस्था का मरीज आईसीयू में पहुंच गया है लेकिन मरीज का उपचार आईसीयू के बाहर ही अप्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है।
प्रश्न- विपक्ष अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर क्या कर रहा है?
शुक्ला- इस मुद्दे पर विपक्ष बराबर सामने आ रहा है। संसद में हम लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तरप्रदेश के दौरे में यह बात लगातार उठाती रहती हैं। मीडिया में यह बड़ा सामान्य प्रश्न हो गया है कि विपक्ष इस पर कुछ नहीं कर रही, जबकि विपक्ष लगातार इस मुद्दों को उठा रही है। वर्तमान में देश का हर व्यक्ति परेशान है। छोटे-बड़े उद्योगपति, किसान, व्यापारी, आम आदमी सब परेशान है।
प्रश्न- टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने व्यस्त शेड्यूल को लेकर सवाल उठाए हैं, आपने भी उनकी चिंता को सही बताया है?
शुक्ला- विनोद राय की अध्यक्षता वाली बीसीसीआई की प्रशासनिक कमेटी (सीओए) ने भारतीय टीम के लिए बेहद खराब शेड्यूल बनाया है। मेरा यह मानना है कि खिलाड़ियों को हर दौरे पर परिस्थितियों में ढलने और आराम के लिए कुछ समय मिलना जरूरी है। दो श्रृंखला के बीच पर्याप्त समय होना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को आराम का भी समय मिल सके। टीम इंडिया का क्रिकेट कैलेंडर काफी व्यस्त और तकलीफ देने वाला है। लगातार मैच या सीरीज नहीं होनी चाहिए। सीओए को कार्यक्रम तय करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
प्रश्न- टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के रिटायरमेंट को लेकर तरह-तरह की अफवाहें चल रही हैं?
शुक्ला- यह धोनी को तय करना है कि उन्हें कब संन्यास लेना है, धोनी एक महान खिलाड़ी हैं। अभी उनके अंदर बहुत क्रिकेट है। बीसीसीआई की तरफ से कोई रिटायरमेंट नहीं दिया गया है। यह उन्हें ही तय करना है कि वे कब संन्यास लें। बीसीसीआई में सब मिल-जुलकर कार्य करते हैं।